Friday, 22 December 2017

पत्तागोभी खाने के अनगिनत फायदे Cabbage Benefits For Health

पत्तागोभी खाने के अनगिनत फायदे Cabbage Benefits For Health

पत्तागोभी खाने अनगिनत फायदे Cabbage Benefits For Health


पत्तागोभी खाने के अनगिनत फायदे : हम ज्यादातर पत्ता गोभी का इस्तेमाल साग और सलाद बनाने में ही करते हे। पत्तागोभी में बहोत सारे रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती हे।
पत्ता गोभी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहोत ही गुणकारी और साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी हे। इसके सेवन से हम वेईट लोस करा सकते हे। इसमें सेल्युलोज नमक पदार्थ पाया जाता हे। नियमित रूप से इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रोल कम किया जा सकता हे। आईये जानते हे पत्तागोभी खाने से होने वाले फायदे के बारेमें…

पत्तागोभी खाने के अनगिनत फायदे Cabbage Benefits For Health

* आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रहे इसके लिए आप रोज पत्तागोभी का जूस पीजिए। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। पत्तागोभी में मिनरल्स आयरन और सल्फर भी काफी ज्यादा होते हैं।
* पत्ता गोभी को सर्दी में खाने से ठेर सारे फायदे होते हे। गर्मी के मोसम में इसमें कीड़े पड़ जाते हे, इसलिए आप गर्मी में सावधानी से इसका सेवन करे।
* पत्ता गोभी में फायबर, केरोटिन, विटामिंस B1, B6, K, E, C के अलावा और भी कई विटामिंस भरपूर मात्रा में होते हैं।
* यह खांसी, पित, रक्त विकार व कुष्ट रोग में भी लाभकारी है वं यह भूख भी बठाने में सहायक है।
* यदि आप कब्ज से परेशान हैं तो पत्ता गोभी खाएं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने का भी कार्य करता है।
पत्ता गोभी में दूध के बराबर कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। पेट दर्द के लिए गोभी बहुत फायदेमंद है। अगर आपके मुह के मसूड़े में खून निकल रहा हे तो इसके लीव्स खाने से आप काफी हद तक आराम महसूस कर सकते हे।
* खून की उल्‍टी होने पर गोभी का सेवन करने से फायदा होता है। गोभी की सब्‍जी या कच्‍ची गोभी खाने से खून की उल्टियां होना बंद हो जाती हैं।
* आपको आकर्षक लुक चाहिए तो अपने डाईटिंग में पत्‍ता गोभी का ज्यूस ऐड करे, इससे आप एकदम बेस्ट और गोर्जियेस लुक पाएंगे।
* यदि कैंसर के रोगी पत्ता गोभी के ताजे पत्तों का सेवन नियमित रूप से सुबह खाली पेट करें तो काफी फायदा होता है।
* पत्तागोभी एंटीआक्सीडेंट्स और फेटो-केमिकल्स से भरपूर होती है और इस तरह यह त्वचा संबंधी परेशानियों जैसे पिंपल्स और ब्लैक हेड्स से आपको सुरक्षित रखता है।
* पत्तागोभी आंतों को स्वस्थ रखता हे। इसमें क्लोरीन और सल्फर नमक तत्व पाए जाते हे।
* हड्डियों का दर्द दूर करने के लिए गोभी के रस को गाजर के रस में बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से हड्डियों का दर्द दूर होता है।
* आपके शरीर में मेटाबोलिज़म ठीक रहे इसलिए पत्‍ता गोभी का ज्यूस पिए। पत्तागोभी में चर्बी कम करने का गुण होता हे।
* अनिद्रा में पत्तागोभी की सब्जी तथा रात को सोने से एक घंटा पहले 5 चम्मच रस पीने से खूब नींद आती है।
* यह दिल की बिमारियों से भी हमे बचाता है। पत्तागोभी में मौजूद फाइबर धमनी को साफ करने का कार्य करता है। विशेषज्ञ कहते है कि गोभी को पका कर खाने से कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है।
* पत्तागोभी के ज्यूस में पाया जाने वाले विटामिन E और सिलीकॉन से नए बाल उग आते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से आप काले और घने बाल पा सकते हैं।
* इसमें लो ग्लाइसीमिक इंडेक्स होता है, जिसका मतलब है कि यह धीरे धीरे आपका ब्‍लड शुगर बढाएगी यानी की यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत ही अच्छी सब्जी है।
आम खाने के ज़बरदस्त फायदे : mango benefits in hindi for good health

आम खाने के ज़बरदस्त फायदे : mango benefits in hindi for good health


आम खाने के ज़बरदस्त फायदे : mango benefits in hindi for good health

Mango benefits in hindi for good health : आम पूरी दुनिया में सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला फ्रूट है। आम हमारे भारत अक ‘राष्ट्रीय फल’ है।भारत में आम का उत्पादन 180 लाख टन, चीन में 44.5 लाख टन, थाईलैंड में 31.4 लाख टन, इंडोनेशिया में 20.6 लाख टन, मेक्सिको में 19.0 लाख टन और फिलिपिन्स में 11.0 लाख टन जितना उत्पादन अलग अलग देशो में होता हे चलये देखते है आम खाने के फायदे क्या है ?

 आम के फायदे - Aam ke Fayde in Hindi 

*  मिल्क में आम का रस मिलाकर पीने से शरीर में कमज़ोरी नहि रहती और शरीर मजबूत बनता है।
*  आम खाने के फायदे : एक कप मेंगो शेक में 100 कैलरी होती है।
*  आम हमारी आँखों के लिए भी उत्तम आहार में से एक है। आम में उच्च मात्रा में मौजूद विटामिन ‘A’ नेत्र स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। आम में बीटा कैरोटीन, अल्फा-कैरोटीन और बीटा करयप्टोसानथीन जैसे फ्लावोनोइड्स भी अच्छी मात्रा में मौजूद होता हैं, जो स्वस्थ आँखों के लिए बेहद आवश्यक हैं।
*  आम खाने के फायदे : आम खाना स्वास्थ्य के नज़रिए से बहुत की फायदेमंद है। इसका सेवन करने से आपको विटामिन ‘ए’, ‘सी’ और फाइबर के तत्व मिलते है।
*  आम का सेवन करने से आपके शरीर का कोलेस्ट्रोल स्तर पर नियंत्रण रहता है। इसके अलावा यह रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में भी मदद करता है।
*  मेंगो में आहार को डायजेस्ट करनी की क्षमता होती हैं. आम में ऐसे कई एंजाइम्स होते हैं जो प्रोटीन को कम करने का काम करते हैं।
*  आम में सेंधा नमक और शक्कर डालकर खाने से भूख बढती है।
*  इसका सेवन करने से आपका ब्रेन पावर स्ट्रोंग बनेगा।
*  आम खाने से हमारी त्वचा स्वस्थ और ताजगी से भरी रहती हैं।

Tuesday, 21 November 2017

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी Jhansi Rani Biography

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी Jhansi Rani Biography

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी Jhansi Rani Biography In Hindi

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी Jhansi Rani Biography

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म - 19 नवम्बर 1828, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

रानी लक्ष्मीबाई का स्वर्गवास - 18 जून 1858, कोटा की सराय, ग्वालियर

रानी लक्ष्मीबाई का जीवन सफर - Jhansi Rani Biography in hindi


रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं। बलिदानों की धरती भारत में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने रक्त से देश प्रेम की अमिट गाथाएं लिखीं। यहाँ की ललनाएं भी इस कार्य में कभी किसी से पीछे नहीं रहीं, उन्हीं में से एक का नाम है- झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई। उन्होंने न केवल भारत की बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। उनका जीवन स्वयं में वीरोचित गुणों से भरपूर, अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा है।

रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वनिता थीं। भारत को दासता से मुक्त करने के लिए सन् 1857 में बहुत बड़ा प्रयास हुआ। यह प्रयास इतिहास में भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम या सिपाही स्वतंत्रता संग्राम कहलाता है।

अंग्रेज़ों के विरुद्ध रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरी माना जाता है। 1857 में उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सूत्रपात किया था। अपने शौर्य से उन्होंने अंग्रेज़ों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

अंग्रेज़ों की शक्ति का सामना करने के लिए उन्होंने नये सिरे से सेना का संगठन किया और सुदृढ़ मोर्चाबंदी करके अपने सैन्य कौशल का परिचय दिया था।

झाँसी का युद्ध:

उस समय भारत के बड़े भू-भाग पर अंग्रेज़ों का शासन था। वे झाँसी को अपने अधीन करना चाहते थे। उन्हें यह एक उपयुक्त अवसर लगा। उन्हें लगा रानी लक्ष्मीबाई स्त्री है और हमारा प्रतिरोध नहीं करेगी। उन्होंने रानी के दत्तक-पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया और रानी को पत्र लिख भेजा कि चूँकि राजा का कोई पुत्र नहीं है, इसीलिए झाँसी पर अब अंग्रेज़ों का अधिकार होगा। रानी यह सुनकर क्रोध से भर उठीं एवं घोषणा की कि मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी। अंग्रेज़ तिलमिला उठे। परिणाम स्वरूप अंग्रेज़ों ने झाँसी पर आक्रमण कर दिया। रानी ने भी युद्ध की पूरी तैयारी की। क़िले की प्राचीर पर तोपें रखवायीं। रानी ने अपने महल के सोने एवं चाँदी के सामान तोप के गोले बनाने के लिए दे दिया।

रानी के क़िले की प्राचीर पर जो तोपें थीं उनमें कड़क बिजली, भवानी शंकर, घनगर्जन एवं नालदार तोपें प्रमुख थीं। रानी के कुशल एवं विश्वसनीय तोपची थे गौस खाँ तथा ख़ुदा बक्श। रानी ने क़िले की मज़बूत क़िलाबन्दी की। रानी के कौशल को देखकर अंग्रेज़ सेनापति सर ह्यूरोज भी चकित रह गया। अंग्रेज़ों ने क़िले को घेर कर चारों ओर से आक्रमण किया।

अंग्रेज़ों की कूटनीति:

अंग्रेज़ आठ दिनों तक क़िले पर गोले बरसाते रहे परन्तु क़िला न जीत सके। रानी एवं उनकी प्रजा ने प्रतिज्ञा कर ली थी कि अन्तिम सांस तक क़िले की रक्षा करेंगे। अंग्रेज़ सेनापति ह्यूराज ने अनुभव किया कि सैन्य-बल से क़िला जीतना सम्भव नहीं है। अत: उसने कूटनीति का प्रयोग किया और झाँसी के ही एक विश्वासघाती सरदार दूल्हा सिंह को मिला लिया जिसने क़िले का दक्षिणी द्वार खोल दिया। फिरंगी सेना क़िले में घुस गई और लूटपाट तथा हिंसा का पैशाचिक दृश्य उपस्थित कर दिया। घोड़े पर सवार, दाहिने हाथ में नंगी तलवार लिए, पीठ पर पुत्र को बाँधे हुए रानी ने रणचण्डी का रूप धारण कर लिया और शत्रु दल संहार करने लगीं। झाँसी के वीर सैनिक भी शत्रुओं पर टूट पड़े। जय भवानी और हर-हर महादेव के उद्घोष से रणभूमि गूँज उठी। किन्तु झाँसी की सेना अंग्रेज़ों की तुलना में छोटी थी। रानी अंग्रेज़ों से घिर गयीं। कुछ विश्वासपात्रों की सलाह पर रानी कालपी की ओर बढ़ चलीं। दुर्भाग्य से एक गोली रानी के पैर में लगी और उनकी गति कुछ धीमी हुई। अंग्रेज़ सैनिक उनके समीप आ गए।

रानी लक्ष्मीबाई मृत्यु:

रानी को असहनीय वेदना हो रही थी परन्तु मुखमण्डल दिव्य कान्त से चमक रहा था। उन्होंने एक बार अपने पुत्र को देखा और फिर वे तेजस्वी नेत्र सदा के लिए बन्द हो गए। वह 17 जून, 1858 का दिन था, जब क्रान्ति की यह ज्योति अमर हो गयी। उसी कुटिया में उनकी चिता लगायी गई जिसे उनके पुत्र दामोदर राव ने मुखाग्नि दी। रानी का पार्थिव शरीर पंचमहाभूतों में विलीन हो गया और वे सदा के लिए अमर हो गयीं। इनकी मृत्यु ग्वालियर में हुई थी। विद्रोही सिपाहियों के सैनिक नेताओं में रानी सबसे श्रेष्ठ और बहादुर थी और उसकी मृत्यु से मध्य भारत में विद्रोह की रीढ़ टूट गई।

Monday, 20 November 2017

तुलसी के पत्ते खाने के अनगिनत फायदे

तुलसी के पत्ते खाने के अनगिनत फायदे

तुलसी के पत्ते खाने के अनगिनत फायदे 

तुलसी के पत्ते खाने के अनगिनत फायदे

तुलसी भारत में हिन्दुओं के लिए पूजनीय पौधा है, इसे अधिकतर हिन्दू परिवारों के घर के आंगन में देखा जा सकता है. हिन्दुओं में ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. तुलसी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं इसलिए इसका आयुर्वेदिक में महत्वपूर्ण स्थान है.


तुलसी के पत्ते में कई पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, मैगनीज और ओमेगा 3 मौजूद होते हैं. तुलसी में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल के गुण पाए जाते हैं जो छोटे-मोटे बीमारी से तुरंत छुटकारा दिला देता है. ऐसे में तुलसी के पत्ते का रोज सुबह सेवन करने से आपकी स्वास्थ्य ठीक रहेगा. यहाँ हम रोज सुबह तुलसी के पत्ते खाने से होने वाले लाभ के बारे में बताने वाले हैं.

रोज सुबह तुलसी के पत्ते खाने से होते हैं ये अनगिनत फायदे


1.रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है -

रोज सुबह नहाने के बाद खाली पेट 3 से 5 तुलसी के पत्ते चबाकर खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है. जिसकी वजह से बार-बार होने वाली बुखार और कमजोरी से छुटकारा मिल जाएगा. आपको बता दें कि जब हमारे शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तभी बुखार जैसी कई बीमारी होती है.

2. मुंह की बदबू से छुटकारा -

रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते खाने से मुंह से आने वाली की समस्या से निजात मिलता है. अगर आपको भी यह समस्या हैं तो जरुर तुलसी के पत्ते का सेवन करें.

3. सर्दी-जुकाम में राहत -

सर्दी और जुकाम होने पर तुलसी का पत्ता रामबाण साबित होता है. सर्दी-जुकाम होने पर तुलसी के पत्ते चबा-चबाकर खाना चाहिए या फिर चाय में तुलसी के पत्ते मिलाकर पीना चाहिए. ऐसे करने से कुछ ही मिनटों में इस बीमारी से राहत मिल जाता है.

इसके अलावा और भी कई फायदे हैं, जैसे - आँखों की रोशनी बढती है, मानसिक व शारीरिक तनाव दूर होता है, खांसी के लिए फायदेमंद है, सिर दर्द से निजात मिलता है और त्वचा संबंधी रोग समाप्त हो जाते हैं.
 प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका जानिए

प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका जानिए

 प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका जानिए 


 प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका जानिए

आजकल हर कोई युवा अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिम जाना पसंद करता है. केवल जिम जाने से ही बॉडी नहीं बनती बल्कि इसके अनुरूप खुराक भी लेना जरुरी होता है. जिम जाने वालों के लिए सबसे जरुरी है प्रोटीन आहार लेना तभी बॉडी बन पाएगा, अन्यथा आपके जिम जाने का कोई मतलब नहीं रहेगा.

वैसे तो मार्केट में प्रोटीन पाउडर उपलब्ध होते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ ज्यादा ही जेब ढीला करना पड़ता है और कभी-कभी ये साइड इफ़ेक्ट भी कर देता है. अगर कम बजट में ही प्रोटीन पाउडर पाना चाहते हैं तो इसे आप खुद घर पर बना सकते है, जो फायदे ही फायदे रहेगा और किसी प्रकार का साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहेगा. यहाँ हम घर पर प्रोटीन पाउडर बनाने की विधि बताने वाले हैं.

घर पर प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका ghar par protein powder kaise banaye in hindi


आवश्यक सामग्री -
  1. घर पर प्रोटीन पाउडर बनाने के लिए हमें इन चीजों की जरुरत होगी,
  2. मिल्क पाउडर या चॉकलेट पाउडर - 200 ग्राम,
  3. सोयाबीन - 200 ग्राम,
  4. बादाम - 200 ग्राम,
  5. मूंगफली - 200 ग्राम

बनाने की विधि -

सबसे पहले सोयाबीन, बादाम और मूंगफली को धूप में रखकर सूखा दें और इन तीनों को एक साथ मिलाकर मिक्सर की सहायता से अच्छी तरह पीस लें. जब यह पाउडर की तरह पीसा जाए तब इसे किसी बर्तन में निकालकर रख दें और इसमें मिल्क पाउडर मिला दीजिये, मिल्क पाउडर न होने पर चॉकलेट पाउडर भी मिला सकते हैं. इस तरह प्रोटीन पाउडर तैयार हो जायेगा.

ऐसे करें इस्तेमाल -

तैयार किए गए इस प्रोटीन पाउडर का सेवन रोज सुबह खाली पेट एक गिलास दूध के साथ कर सकते हैं. जो लोग जिम जाते हैं वे दूध में 5 चम्मच प्रोटीन पाउडर मिला सकते हैं और जो जिम नहीं जाते वे इसे 3 चम्मच मिलाएं. ऐसा करने से आपको मजबूत शरीर मिलेगा तथा वजन भी बढेगा और इसके अलावा अन्य कई फायदे होंगे.
इस प्रकार हमारे द्वारा बताए गए प्रोटीन पाउडर बनाने का तरीका को अपनाएं और घर पर ही बनाये और दबदबा शरीर पाएं.

सरदार भगत सिंह का जीवन परिचय

सरदार भगत सिंह का जीवन परिचय

सरदार भगत सिंह का जीवन परिचय

सरदार भगत सिंह का जीवन परिचय Bagat Singh Biography In Hindi

सरदार भगतसिंह का नाम विश्व में 20वीं शताब्दी के अमर शहीदों में बहुत ऊँचा है। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। भगतसिंह अपने देश के लिये ही जीये और उसी के लिए शहीद भी हो गये।

क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में:

1919 में रॉलेक्ट एक्ट के विरोध में संपूर्ण भारत में प्रदर्शन हो रहे थे और इसी वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग़ काण्ड हुआ । इस काण्ड का समाचार सुनकर भगतसिंह लाहौर से अमृतसर पहुँचे। देश पर मर-मिटने वाले शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि दी तथा रक्त से भीगी मिट्टी को उन्होंने एक बोतल में रख लिया, जिससे सदैव यह याद रहे कि उन्हें अपने देश और देशवासियों के अपमान का बदला लेना है ।

असेम्बली बमकाण्ड:

गंभीर विचार-विमर्श के पश्चात् 8 अप्रैल 1929 का दिन असेंबली में बम फेंकने के लिए तय हुआ और इस कार्य के लिए भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त निश्चित हुए। यद्यपि असेंबली के बहुत से सदस्य इस दमनकारी क़ानून के विरुद्ध थे तथापि वायसराय इसे अपने विशेषाधिकार से पास करना चाहता था। इसलिए यही तय हुआ कि जब वायसराय पब्लिक सेफ्टी बिल को क़ानून बनाने के लिए प्रस्तुत करे, ठीक उसी समय धमाका किया जाए और ऐसा ही किया भी गया। जैसे ही बिल संबंधी घोषणा की गई तभी भगत सिंह ने बम फेंका। इसके पश्चात् क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करने का दौर चला। भगत सिंह और बटुकेश्र्वर दत्त को आजीवन कारावास मिला।
भगत सिंह और उनके साथियों पर लाहौर षड़यंत्र का मुक़दमा भी जेल में रहते ही चला। भागे हुए क्रांतिकारियों में प्रमुख राजगुरु पूना से गिरफ़्तार करके लाए गए। अंत में अदालत ने वही फैसला दिया, जिसकी पहले से ही उम्मीद थी। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को मृत्युदंड की सज़ा मिली।

फाँसी की सज़ा:

23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु देशभक्ति को अपराध कहकर फाँसी पर लटका दिए गए। यह भी माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी, लेकिन जन रोष से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही इन वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी और रात के अंधेरे में ही सतलुज के किनारे उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। लाहौर षड़यंत्र के मुक़दमे में भगतसिंह को फ़ाँसी की सज़ा मिली तथा 23 वर्ष 5 माह और 23 दिन की आयु में ही, 23 मार्च 1931 की रात में उन्होंने हँसते-हँसते संसार से विदा ले ली। भगतसिंह के उदय से न केवल अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को गति मिली वरन् नवयुवकों के लिए भी प्रेरणा स्रोत सिद्ध हुआ। वे देश के समस्त शहीदों के सिरमौर थे। 24 मार्च को यह समाचार जब देशवासियों को मिला तो लोग वहाँ पहुँचे, जहाँ इन शहीदों की पवित्र राख और कुछ अस्थियाँ पड़ी थीं। देश के दीवाने उस राख को ही सिर पर लगाए उन अस्थियों को संभाले अंग्रेज़ी साम्राज्य को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेने लगे। देश और विदेश के प्रमुख नेताओं और पत्रों ने अंग्रेज़ी सरकार के इस काले कारनामे की तीव्र निंदा की।

Saturday, 18 November 2017

मंगल पांडे की जीवनी Mangal Pandey Biography

मंगल पांडे की जीवनी Mangal Pandey Biography

मंगल पांडे की जीवनी

मंगल पांडे का लोकप्रिय नारा -  मारो फ़िरंगी को!!!

मंगल पांडे का जन्म - 30 जनवरी 1831, नगवा गांव, बलिया जिला

मंगल पांडे का स्वर्गवास - 8 अप्रैल 1857, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल

मंगल पांडे का जीवन सफर : मंगल पांडे की जीवनी


मंगल पांडे अथवा मंगल पान्डेय का नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी योद्धाओं के रूप में लिया जाता है, जिनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे। ब्रह्मदेश (बर्मा {वर्तमान म्यांमार}) पर विजय तथा सिक्ख युद्ध की समाप्ति के पश्चात अंग्रेज़ों ने भारतवर्ष पर निष्कंटक राज्य करने के सपने देखें होंगे; पर उन्हें क्या पता था कि सन 1857 का वर्ष उनकी आशाओं पर तुषारपात का वर्ष सिद्ध होगा।

जंग-ए-आज़ादी:

भारतीय इतिहास में 29 मार्च, 1857 का दिन अंग्रेजों के लिए दुर्भाग्य के दिन के रूप में उदित हुआ। पाँचवी कंपनी की चौंतीसवीं रेजीमेंट का 1446 नं. का सिपाही वीरवर मंगल पांडे अंग्रेज़ों के लिए प्रलय-सूर्य के समान निकला। बैरकपुर की संचलन भूमि में प्रलयवीर मंगल पांडे का रणघोष गूँज उठा-

बंधुओ! उठो! उठो! तुम अब भी किस चिंता में निमग्न हो? उठो, तुम्हें अपने पावन धर्म की सौगंध! चलो, स्वातंत्र्य लक्ष्मी की पावन अर्चना हेतु इन अत्याचारी शत्रुओं पर तत्काल प्रहार करो।



मंगल पांडे के बदले हुए तेवर देखकर अंग्रेज़ सारजेंट मेजर ह्यूसन उसने पथ को अवरुद्ध करने के लिए आगे बढ़ा। उसने उस विद्रोही को उसकी उद्दंडता का पुरस्कार देना चाहा। अपनी कड़कती आवाज़ में उसने मंगल पांडे को खड़ा रहने का आदेश दिया। वीर मंगल पांडे के अरमान मचल उठे। वह शिवशंकर की भाँति सन्नद्ध होकर रक्तगंगा का आह्वान करने लगा। उसकी सबल बाहुओं ने बंदूक तान ली। उसकी सधी हुई उँगलियों ने बंदूक का घोड़ा अपनी ओर खींचा और घुड़ड़ घूँsss का तीव्र स्वर घहरा उठा। मेजर ह्यसन घायल कबूतर की भाँति भूमि पर तड़प रहा था। उसका रक्त भारत की धूल चाट रहा था। 1857 के क्रांतिकारी ने एक फिरंगी की बलि ले ली थी। विप्लव महायज्ञ के पुरोधा मंगल पांडे की बंदूक पहला स्वारा बोल चुकी थी। स्वातंत्र्य यज्ञ की वेदी को दस्यु-देह की समिधा अर्पित हो चुकी थी।

अंग्रेज़ी सेना द्वारा बंदी:

वीर मंगल पांडे ने अपने कर्तव्य की पूर्ति कर दी थी। शत्रु के रक्त से भारत भूमि का तर्पण किया था। मातृभूमि की स्वाधीनता जैसे महत कार्य के लिए अपनी रक्तांजलि देना भी अपना पावन कर्तव्य समझा। मंगल पांडे ने अपनी बंदूक अपनी छाती से अड़ाकर गोली छोड़ दी। गोली छाती में सीधी न जाती हुई पसली की तरफ फिसल गई और घायल मंगल पांडे अंग्रेज़ी सेना द्वारा बंदी बना लिये गये। अंगेज़ों ने भरसक प्रयत्न किया कि वे मंगल पांडे से क्रांति योजना के विषय में उसके साथियों के नाम-पते पूछ सकें; पर वह मंगल पांडे थे, जिनका मुँह अपने साथियों को फँसाने के लिए खुला ही नहीं।



कारतूस घटना:

1857 के विद्रोह का प्रारम्भ एक बंदूक की वजह से हुआ था। सिपाहियों को 1853 में एनफ़ील्ड बंदूक दी गयी थीं, जो कि 0.577 कैलीबर की बंदूक थी तथा पुरानी और कई दशकों से उपयोग में लायी जा रही ब्राउन बैस के मुकाबले में शक्तिशाली और अचूक थी। नयी बंदूक में गोली दागने की आधुनिक प्रणाली का प्रयोग किया गया था, परन्तु बंदूक में गोली भरने की प्रक्रिया पुरानी थी। नयी एनफ़ील्ड बंदूक भरने के लिये कारतूस को दांतों से काट कर खोलना पड़ता था और उसमे भरे हुए बारूद को बंदूक की नली में भर कर कारतूस में डालना पड़ता था। कारतूस का बाहरी आवरण में चर्बी होती थी, जो कि उसे नमी अर्थात पानी की सीलन से बचाती थी।

सिपाहियों के बीच अफ़वाह फ़ैल चुकी थी कि कारतूस में लगी हुई चर्बी सुअर और गाय के मांस से बनायी जाती है। यह हिन्दू और मुसलमान सिपाहियों दोनों की धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध था। अंग्रेज अफ़सरों ने इसे अफवाह बताया और सुझाव दिया कि सिपाही नये कारतूस बनायें, जिसमें बकरे या मधुमक्क्खी की चर्बी प्रयोग की जाये। इस सुझाव ने सिपाहियों के बीच फ़ैली इस अफवाह को और मज़बूत कर दिया। दूसरा सुझाव यह दिया गया कि सिपाही कारतूस को दांतों से काटने की बजाय हाथों से खोलें। परंतु सिपाहियों ने इसे ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे कभी भी नयी कवायद को भूल सकते हैं और दांतों से कारतूस को काट सकते हैं। तत्कालीन अंग्रेज अफ़सर प्रमुख (भारत) जार्ज एनसन ने अपने अफ़सरों की सलाह को दरकिनार हुए इस कवायद और नयी बंदूक से उत्पन्न हुई समस्या को सुलझाने से मना कर दिया।

29 मार्च सन् 1857 को नए कारतूस को प्रयोग करवाया गया, मंगल पांडे ने आज्ञा मानने से मना कर दिया और धोखे से धर्म को भ्रष्ट करने की कोशिश के ख़िलाफ़ उन्हें भला-बुरा कहा, इस पर अंग्रेज अफ़सर ने सेना को हुकम दिया कि उसे गिरफ्तार किया जाये, सेना ने हुक्म नहीं माना। पलटन के सार्जेंट हडसन स्वंय मंगल पांडे को पकड़ने आगे बढ़ा तो, पांडे ने उसे गोली मार दी, तब लेफ्टीनेंट बल आगे बढ़ा तो उसे भी पांडे ने गोली मार दी। घटनास्थल पर मौजूद अन्य अंग्रेज़ सिपाहियों नें मंगल पांडे को घायल कर पकड़ लिया। उन्होंने अपने अन्य साथियों से उनका साथ देने का आह्वान किया। किन्तु उन्होंने उनका साथ नहीं दिया। उन पर मुक़दमा (कोर्ट मार्शल) चलाकर 6 अप्रैल, 1857 को मौत की सज़ा सुना दी गई।

मंगल पांडे निधन:

फ़ौजी अदालत ने न्याय का नाटक रचा और फैसला सुना दिया गया। 8 अप्रैल का दिन मंगल पांडे की फाँसी के लिए निश्चित किया गया। बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के पवित्र ख़ून से अपने हाथ रँगने से इनकार कर दिया। तब कलकत्ता से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया। भारत के एक वीर पुत्र ने आज़ादी के यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दे दी। वीर मंगल पांडे के पवित्र प्राण-हव्य को पाकर स्वातंत्र्य यज्ञ की लपटें भड़क उठीं। क्रांति की ये लपलपाती हुई लपटें फिरंगियों को लील जाने के लिए चारों ओर फैलने लगीं।