SUNITA DEVI

इस कारण किन्नर के रूप में होता है जन्म




किन्नर एक आम इंसान की तरह होते है बस इनकी शरीर की बनावट थोड़ी अलग होती है जिनसे इन्हें कुछ अलग ही दर्जा दिया जाता है। इन्हें मान सम्मान नहीं दिया जाता और इनका मजाक बनाया जाता है। लेकिन फिर भी किन्नरो के बारे में एक बात प्रचलित है की अगर ये किसी के सर पर एक बार हाथ रख कर उसे आशीर्वाद दे दे तो उसकी ज़िन्दगी संवर जाती है। और यही वजह है कि किसी भी अच्छे काम से पहले इन्हें नाच-गाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। जहाँ ये जाकर अपना आशिर्वाद लोगों को देते हैं।

आज हम आपको इन्ही के बारे में बताने जा रहे है की किन कारणों से एक इंसान का किन्नर के रूप में जन्म होता है। शास्त्रो में भी इसका उल्लेख किया गया है की ऐसा क्यों होता है आज हम आपको उसी बारे में बताने जा रहे है।

जी ज्योतिष विद्या की माने तो व्यक्ति की जन्मपत्री के आठवें घर में शुक्र और शनि मौजूद हों और इन्हें गुरु और चन्द्र नहीं देख रहे हों, तो व्यक्ति का जन्म नपुंसक के रूप में होता है। इसी तरह ज्योतिष विद्या का इस्तेमाल कर भी बताया जा सकता है कि व्यक्ति बड़े होकर तीसरी श्रेणी में अपनी जगह बनाएगा या नहीं।

इसके आलावा शास्त्रो में भी यह माना गया है की जिस व्यक्ति के पूर्व जन्मों के कर्म बुरे हों और व्यक्ति पाप का भागिदार हो तो उसे किन्नर का जन्म मिलता है। इसके अलावा शास्त्रों में किन्नरों का उल्लेख ज़रूर किया गया है, लेकिन कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया गया कि किन्नरों का अपमान करना सहीं है और उन्हें निचले दर्जे का समझना चाहिए।

अगर कोई भी व्यक्ति किन्नरों का सम्मान नहीं करता या उनका मज़ाक उड़ाता है, तो शास्त्रों के अनुसार उसे अगला जन्म किन्नर का मिलता है। और उसे भी इसी तरह के अपमान को भुगतना पड़ता है।